Berlin from MoneyHeist personality breakdown in Hindi - Thomas Shelby Sigma male 📎👇
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MoneyHeist वेब सीरीज में
प्रोफेसर पूरे प्लान का मास्टरमाइंड है,
वो पहले कई कदम आगे की सोचकर
अपने plans बनाता है।
प्रोफेसर ये जानता है कि
उसकी टीम में इंसान हैं, रोबोट्स नहीं,
इसलिए कोई ना कोई पंगा ज़रूर होगा।
एक ऐसी टीम जिसमे सभी लोग
अपने आप को बड़ी तोप समझते हों,
ऐसी टीम को ऐसा ही बंदा सम्भाल सकता है,
जो हर मामले में सबका 'बाप' हो।
आज हम प्रोफेसर की टीम के
उसी 'बाप' की बॉडी लैंग्वेज और पर्सनालिटी को डिकोड करेंगे।
वीडियो में आगे बढ़ने से पहले,
प्लीज़ इस चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए,
तो चलिए, वीडियो को शुरू करते हैं।
बर्लिन अपनी टीम को सामने से लीड कर रहा है।
अच्छा लीडर हमेशा पहले कोई काम परफेक्शन से करके
अपनी टीम के सामने एग्जाम्पल और स्टेण्डर्ड्स सेट करता है।
अभी बर्लिन का मेन टारगेट
सभी होस्टेज़स के दिल में इतना ख़ौफ़ पैदा करना है कि
होस्टेज़ इनके प्लान में दिक़्क़त पैदा करने का
सोचने से पहले कम से कम 100 बार सोचें।
इस औरत को देखो,
इसने अपने फेस की मसल्स को टाइट किया
और थूक गटका,
मतलब ये बहुत ज़्यादा डरी हुई है।
बर्लिन को देखो, वो कितना स्लो है।
आदमी को बुरी सिचुएशन से ज़्यादा
उसके बुरे ख्याल डराते हैं,
बर्लिन सब कुछ धीरे धीरे करके,
होस्टेज़ को सोचने का पूरा टाइम दे रहा है,
ताकि वो ख़ुद ही बुरा सोचकर
अपने अंदर ख़ौफ़ पैदा कर लें।
बर्लिन के फेस को देखो,
उसके फेस पर ज़रा भी टेंशन नहीं है।
साथ ही उसकी चिन हल्की सी ऊपर उठी हुई है,
जो दिखाता है कि वो
अपने आप को इन सब से सुपीरियर समझता है।
वहीं पीछे डेनवर को देखो,
उसके आपस में दबे हुए होंठ दिखाते हैं कि
वो stress और anxiety से जूझ रहा है।
बर्लिन के माथे की लकीरों
और उसकी आँखों को देखो,
वो इतना genuine है कि
तकलीफ़ की बातें करते हुए सामने वालों की
तकलीफ़ के बारे में सोच भी रहा है।
बर्लिन ने कितने प्यार से सबको मौत की धमकी दे दी।
वो अपनी एनर्जी बिलकुल भी वेस्ट नहीं कर रहा।
बर्लिन की साँसों और
होस्टेज़ की साँसों के फ़रक को देखिए।
बर्लिन की साँसे उसके कंट्रोल में हैं,
जब तक आपकी साँसे आपके क़ाबू में हैं,
आपका दिलोदिमाग़ अपने आप आपके क़ाबू में रहता है।
बर्लिन जानता है कि
अगर इन लोगों में डर बहुत ज़्यादा हो गया
तो ये बैकफ़ायर भी कर सकता है,
इसलिए वो स्मार्टली इन लोगों के डर को
अपने कंट्रोल में रख रहा है।
आइये अब अगले सीन पर आते हैं,
बर्लिन ने लंबी सांस लेकर
अपने आप को ऑक्सीजन से भर लिया।
बर्लिन की ऊपर उठी मुंडी के कारण
उसकी आँखों को नीचे देखना पड़ रहा है,
ये दिखाता है कि वो इन सबको ख़ुद से
नीचा और कमज़ोर समझता है।
टोक्यो को देखो, उसने अपनी अपर बॉडी को रिलैक्स्ड छोड़ रखा है
और वो अपने आप को
चौड़ा दिखा रही है।
ऐसा करके वो ख़ुद को हाई कॉन्फिडेंस और
ताकतवर पेश कर रही है।
टोक्यो से बात करते हुए भी
बर्लिन के फेस पर स्माइल है और
उसकी चिन अप है,
मतलब वो इन सब की परवाह बिलकुल नहीं कर रहा।
टोक्यो ने पहले बर्लिन से
प्साइकोलॉजिकली खेलने की कोशिश की,
उसने बर्लिन को पहले इस दवाई की
इम्पोर्टेंस बताकर इस दवाई की सीशी को फोड़ दिया
ताकि बर्लिन पर इसका प्रेशर पड़े।
बर्लिन ने इसको भी सीरियसली नहीं लिया,
ऐसा करके उसने टोक्यो का पहला रास्ता तो बंद कर दिया।
टोक्यो ने यहाँ एक बेवक़ूफ़ी की,
उसने जाने अनजाने में बर्लिन को ये दिखा दिया
कि वो अंदर से डरी हुई है।
टोक्यो जानती है कि बर्लिन मरा तो तो वो सब भी मारे जाएँगे,
उसकी गीली आँखें दिखा रही हैं कि
वो अपने इमोशंस और ग़ुस्से को जबरन कंट्रोल कर रही है।
लड़कियों के लिए अपने इमोशंस कंट्रोल करना
बहुत मुश्किल होता है,
इसलिए आप उन्हें जहां तहाँ रोते हुए देख सकते हैं।
टोक्यो की इस शकल को देखो,
वो बेइंतिहा ग़ुस्से में है,
ये चेहरा उसकी बर्लिन के लिए बढ़ती नफ़रत को दिखा रहा है।
बर्लिन ने थूक गटका, मतलब उसको थोड़ा बुरा लगा,
लेकिन उसने अपने आप को वहीं पर क़ाबू कर लिया।
बर्लिन ने हाथ काटने का आईडिया देकर
टोक्यो को दिखा दिया कि ये पनिशमेंट उसको नहीं डरा सकती,
उसको कुछ और सोचना चाहिए।
साथ ही ऐसा करके उसने
अपनी दवाइयों की बाक़ी सीशियों को भी बचा लिया।
बर्लिन ने टोक्यो के सिर के ऊपर से डेनवर से बात करने की कोशिश की,
ऐसा करके उसने तीसरे बंदे को भी
बीच में इंटरफेयर करने के लिए इन्वाइट किया।
टोक्यो अब बर्लिन पर एक और नया तरीक़ा आज़मायेगी।
बर्लिन के फेस पर बिलकुल भी डर नहीं है,
ना ही उसकी आवाज़ की टोन में
कोई फ़रक आया,
टोक्यो भी सोच रही होगी
कि उसने एक ग़लत आदमी से पंगा ले लिया।
रिओ को देखो, उसका सिर झुका हुआ है
और उसने अपना जबड़ा
टाइटली दबा रखा है,
वो ग़ुस्से के साथ स्ट्रेस में है,
वो यहाँ बेबस महसूस कर रहा है,
वहीं डेनवर भी अपनी जगह से
अपने पैर उखाड़कर अपनी टेंशन को रिलीज़ करने की कोशिश कर रहा है।
बर्लिन तो मरने के लिए तैयार था,
लेकिन टोक्यो की लंबी साँसे दिखा रही है कि
उसका ये तरीक़ा भी कोई काम नहीं आ रहा।
हर एक ब्लेंक क्लिक के साथ
ये लोग डर रहे हैं क्योंकि
ये लोग जानते हैं कि बर्लिन अगर मरा
तो सब ख़त्म हो जायेगा।
बर्लिन भी जानता है कि
, अब उसके मरने का टाइम आ गया है,
उसका खुला हुआ मुँह दिखा रहा है कि
उसको अधिक ऑक्सीजन की ज़रूरत है,
वो थोड़ा नर्वस है।
लेकिन तब भी वो ख़ुद के क़ाबू में है
और डरकर अपने प्रिंसिपल्स से समझौता नहीं कर रहा।
बर्लिन ने लंबी सांस छोड़कर
अपने स्ट्रेस को रिलीव किया..
और अपनी पुरानी टोन में आ गया।
टोक्यो की सारी मेहनत नैरोबी ने
एक झटके में ख़राब कर दी।
प्रोफेसर ने सारे सीक्रेट्स सबके साथ शेयर नहीं किए थे,
उसने बर्लिन को इन सब का लीडर बनाया
क्योंकि बर्लिन सुलझे हुए दिमाग़ का है,
वो मर जाएगा लेकिन
अपने प्रिंसिपल्स, अपनी इज़्ज़त और प्लान के साथ समझौता नहीं करेगा।
यहाँ बर्लिन ने तेज़ आवाज़ में बोलकर,
उल्टा ही टोक्यो को धमका दिया।
टोक्यो के आपस में दबे हुए होंठ
दिखा रहे हैं कि वो
भयंकर दबाव में है।
डेनवर को देखो,
वो भी बर्लिन की बातों से इन्फ्लुएंस होकर
टोक्यो की तरह प्रेशर में आ गया है,
वहीं दूसरी और रिओ कन्फ्यूज्ड है,
उसको कुछ भी समझ में नहीं आ रहा।
नैरोबी और बर्लिन में बेशक नहीं बनती हो,
लेकिन दोनों में एक बात कॉमन है,
वो बात है, प्रोफेसर के प्लान में अटूट विश्वास।
बर्लिन जहां इस मिशन का
एडमिनिस्ट्रेटिव लीडर है,
वहीं, नैरोबी टेक्निकल और ऑपरेशनल लीडर।
उसने बीच में इंटरफेयर करके
सिचुएशन को क़ाबू में कर लिया।
बर्लिन का फ़ंडा एकदम क्लियर है,
वो अपना हिसाब किताब fit रखता है।
देखना, अब वो टोक्यो के साथ अपना हिसाब
कैसे बराबर करता है।
इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी
वो बिलकुल ग़ुस्सा नहीं लग रहा,
वो तो लाजवाब हंस रहा है।
वो जब भी सामने वाले की लेता है,
बेइंतिहा प्यार से लेता है।
टोक्यो अंदर तक सहम गई है,
वो बेबसी में तड़पड़ा रही है
और बर्लिन उसके मज़े लेते हुए उसको चिढ़ा रहा है।
बर्लिन के लिए प्लान सबसे important है,
और वो प्लान को ख़राब करने वालों को
बिलकुल टॉलरेट नहीं करता।
वो टीम मेंबर्स को को या तो
अपने क़ाबू में रखता है
या उनके बेक़ाबू होने पर
टीम से बाहर फेंक देता है।
बर्लिन की सुलझी हुई खोपड़ी
और उसके सीधे सीधे उसूल ही
उसको इतना अच्छा लीडर बनाते हैं।
वो अपनी टीम और प्लान के लिए जान ले भी सकता है
और अपनी जान दे भी सकता है।
तो दोस्तों,
आपने इस वीडियो से क्या सीखा?
पॉइंट नो १ डर भी एक हथियार होता है,
अगर आपने डराना सीख लिया
तो आप आधी लड़ाइयाँ बिना लड़े ही जीत सकते हो,
लेकिन डर अगर क़ाबू से बाहर हो जाये
तो बात उल्टी भी पड़ सकती है।
इसलिए, ना कम, ना ज़्यादा,
अपना ख़ौफ़ controlled way में बनाये रखो।
Point no 2
अगर आपकी टीम में एक से ज़्यादा लोग
माहौल को ख़राब कर रहे हैं
तो सबसे उलझने की जगह,
सबसे पहले सबसे ज़्यादा दिक़्क़त पैदा करने वाले को पेलो,
उसके चेले चपाटों के साथ साथ
छोटे मोटे फट्टू ग़फ़लतबाज़ अपने आप शांत हो जाएँगे।
तो दोस्तों,
आपको ये वीडियो कैसी लगी?
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मिलते हैं अगली वीडियो में,
जय हिन्द।
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